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अलविदा 2020: बीएस 6 एमिशन नॉर्म्स लागू होने से लेकर शून्य बिक्री तक, पढ़िए 10 घटनाएं जिनकी वजह से सुर्खियों में रहा ऑटो उद्योग

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नई दिल्लीएक घंटा पहले

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  • केंद्र ने आदेश दिया कि 1 अप्रैल, 2020 के बाद केवल बीएस 6 कंप्लेंट वाहन ही बनाए, बेचे और रजिस्टर्ड किए जाएंगे
  • स्क्रैपेज पॉलिसी का उद्देश्य सड़कों पर चलने वाले पुराने वाहनों को बाहर निकालना है जो पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं

साल 2020 भारतीय ऑटो उद्योग के लिए काफी कठिन रहा, क्योंकि इसने पिछले साल इसने मंदी का दौर देखा वहीं इस साल उद्योग को महामारी का सामना करना पड़ा था। महामारी के दौरान लगे देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अप्रैल में लगभग सभी कंपनियों की बिक्री शून्य रही, तो वहीं बीएस 6 एमिशन नॉर्म्स लागू होने के कारण वाहन निर्माताओं को अपनी पूरी लाइनअप में बदलाव करना पड़ा। इस दौरान निर्माताओं ने कई वाहनों का निर्माण हमेशा के लिए बंद कर दिया। इसके अलावा सरकार द्वारा हेलमेट और कार सेफ्टी के लिए भी कुछ नए स्टैंडर्ड्स लागू किए गए।

आज हम आपको ऑटो जगत से जुड़ी ऐसी ही 10 घटनाओं की जानकार दे रहे हैं, जिनकी वजह से ऑटो उद्योग इस साल काफी सुर्खियां में रहा…

1. बीएस 6 एमिशन नॉर्म्स लागू

  • बीएस 6 एमिशन नॉर्म्स इस सूची में सबसे ऊपर है, जो इस साल का सबसे कठोर बदलाव था। केंद्र सरकार ने आदेश दिया था कि 1 अप्रैल, 2020 के बाद, केवल बीएस 6 कंप्लेंट वाहन ही बनाए, बेचे और रजिस्टर्ड किए जाएंगे।
  • इस कदम ने वाहन निर्माताओं को फेरबदल करने और अपने पूरे पोर्टफोलियो को अपडेट करने पर मजबूर कर दिया। जहां बीएस 6 फॉर्मूला कुछ वाहन निर्माताओं के लिए काम कर रहा है, वहीं कुछ अभी भी अपने पुराने पोर्टफोलियो की तुलना में बेहतर बिक्री के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

2. फ्रंट पैसेंजर के लिए भी एयरबैग अनिवार्य

  • सरकार ने घोषणा की है कि आगे की सीटों पर एयरबैग्स जल्द ही अनिवार्य होंगे। 2019 में, सरकार ने ड्राइवर सीट के लिए एयरबैग अनिवार्य कर दिया था और अब फ्रंट पैसेंजर के लिए भी इकोनॉमी मॉडल सहित सभी कारों में समान स्तर की सुरक्षा प्रदान की जानी है।
  • यह कदम लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत आवश्यक था क्योंकि भारत में बेची जा रही कई कारें अभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ कारें ग्लोबल एनकैप की सुरक्षित कारों की लिस्ट में प्रवेश नहीं कर पाई हैं।

3. हेलमेट के लिए नए स्टैंडर्ड्स

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अनिवार्य किया है कि सभी हेलमेट 1 जून, 2021 से आईएसआई मार्क को धारण करें। हेलमेट को आईएसआई स्टैंडर्ड्स के अनुरूप होना चाहिए और इसका वजन 1.2 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • इसे फैसले की काफी आलोचना भी हुई क्योंकि कई मोटर चालकों ने अंतरराष्ट्रीय हेलमेटों पर थोड़ा अतिरिक्त खर्च किया था, जिनके मानक हाई हैं, जिनका वजन 1.3 किलोग्राम-1.5 किलोग्राम से कम नहीं है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अधिक वजन वाले अंतर्राष्ट्रीय हेलमेटों को गैरकानूनी घोषित किया जाएगा या नहीं।

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4. अप्रैल में शून्य नहीं

  • यह पूरी दुनिया के लिए बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि महामारी ने भारतीय सरकार को कठोर लॉकडाउन की घोषणा करने के लिए मजबूर किया और इसका मतलब था कि शून्य मैन्युफैक्चरिंग और शून्य बिक्री।
  • एक 100% साल-दर-साल की गिरावट बहुत ही निराशाजनक थी लेकिन उद्योग ने साल के अंत में अच्छा रुझान दिखाया और त्योहारी सीजन उद्योग को पटरी पर वापस लाने में मदद की।

5. दिल्ली ईवी पॉलिसी

अगस्त 2020 में दिल्ली सरकार ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की और इस नीति का उद्देश्य ईवी खरीदने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स पर छूट, इन्सेंटिव, लो-इंटरेस्ट लोन, सब्सिडी, इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे भत्ते प्रदान करना है।

6. एचएसआरपी इन्फोर्समेंट ड्राइव

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 2019 से पहले खरीदे गए वाहनों को HSRP (हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) और एक कलर-कोडेड स्टीकर के साथ अनिवार्य कर दिया है।
  • दिल्ली परिवहन विभाग ने ‘प्री-इन्फोर्समेंट ड्राइव’ शुरू किया। इस ड्राइव में कुछ अन्य राज्य भी शामिल हैं, लेकिन डेडलाइन के साथ एक फुल इन्फोर्समेंट ड्राइव केवल अगले साल शुरू होने की उम्मीद है।

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7. ईवी की लागत में कम करने के अलग से बेची जाएगी बैटरी

  • यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। सरकार ने ईवी की लागत को कम करने के लिए इस नियम को लागू किया क्योंकि सबसे महंगा कंपोनेंट बैटरी पैक है।
  • ज्यादातर मामलों में, एक बैटरी पैक ईवीएस लागत का लगभग 40% हिस्सा हो सकता है। इस कदम से भारत में बैटरी उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

8. स्क्रैपेज पॉलिसी

  1. स्क्रैपेज पॉलिसी ने अंततः पॉलिसी मेकर्स का ध्यान आकर्षित कर लिया है और जल्द ही इसे कभी भी लागू किया जा सकता है। नीति का उद्देश्य सड़कों पर चलने वाले पुराने वाहनों को बाहर निकालना है जो पर्यावरण को बड़े पैमाने पर प्रदूषित करते हैं।
  2. रिपोर्ट्स के अनुसार, मानदंड 15 वर्ष से अधिक पुराने और 20 वर्ष से अधिक पुराने निजी वाहनों की स्क्रैपिंग को अनिवार्य कर सकता है। ऑटोमेटेड व्हीकल फिटनेस सर्टिफिकेट यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि आपका वाहन सड़कों पर चलने के योग्य है या नहीं।

9. बैक-टू-बैक एसयूवी लॉन्च

  • यह साल वास्तव में एसयूवी के नाम रहा। इस साल ढेरों एसयूवी लॉन्च हुईं, जिससे ये कहा जा सकता है कि ऑटो उद्योग को महामारी के चंगुल से निकालने के पीछे एसयूवी का अहम रोल रहा। वर्ष के अंत में लॉकडाउन की शुरुआत से ही, एसयूवी सेगमेंट ने अपनी तेजी को बनाए रखा।
  • कॉम्पैक्ट एसयूवी से लेकर लग्जरी एसयूवी तक, बिक्री के आंकड़े ऑटोमेकर्स के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए पर्याप्त थे। इस साल सेगमेंट में सबसे लोकप्रिय नामों में हुंडई क्रेटा, किआ सोनेट, हुंडई वेन्यू, मारुति सुजुकी विटारा ब्रेजा, किया सेल्टोस और निसान मैग्नाइट शामिल थे।

10. उद्योग का डिजिटलीकरण

  • उद्योग ने महामारी के दौरान बहुत सारे बदलाव देखे और डिजिटल होना लॉकडाउन के दौरान देखे गए सबसे सकारात्मक परिवर्तनों में से एक था। शुरू में केवल कॉन्टैक्ट-लेस सर्विस के रूप में शुरू हुआ, जिसमें वाहन, टेस्ट ड्राइव और सर्विसिंग की बुकिंग शामिल थी, जल्द ही एआर-बेस्ड पर्सनलाइज्ड प्रोग्राम की पेशकश करने वाले कई वाहन निर्माताओं के साथ फुली लोडेड ऑनलाइन एक्सपीरियंस में बदल गया। कई अन्य कस्टमर-सेंट्रिक सर्विसेस ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि लोगों को अपनी सुरक्षा से थोड़ा समझौता किए बिना अपने घरों में सबसे अच्छी खरीदारी का अनुभव प्राप्त हो।
  • कुछ अन्य रुझान भी देखे गए जो कि बहुत बड़ा तो नहीं लेकिन निश्चित रूप से ध्यान देने योग्य है। इन कुछ रुझानों में महामारी के दौरान सेकंड हैंड वाहनों की बढ़ती मांग, कुछ कार निर्माताओं द्वारा सब्सक्रिप्शन मॉडल का अच्छा रिस्पॉन्स शामिल है।

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